श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.179.10 
कृते युगे धर्म आसीत् समग्र-
स्त्रेताकाले ज्ञानमनुप्रपन्न:।
बलं त्वासीद् द्वापरे पार्थ कृष्ण:
कलौ त्वधर्म: क्षितिमेवाजगाम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! सत्ययुग में श्रीकृष्ण सम्पूर्ण धर्म के रूप में विद्यमान थे, त्रेता में सम्पूर्ण ज्ञान या विवेक के रूप में विद्यमान थे, द्वापर में बल के रूप में विद्यमान थे और कलियुग में वे अधर्म के रूप में इस पृथ्वी पर आएंगे (अर्थात् उस समय अधर्म ही शक्तिशाली होगा)।॥10॥
 
Partha! In Satyayuga, Shri Krishna was present in the form of complete Dharma, in Tretayuga he was present in the form of complete knowledge or discretion, in Dwaparyuga he was present in the form of strength and in Kaliyuga he will come to this earth in the form of Adharma (meaning at that time only Adharma will be powerful).॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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