श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.179.1 
युधिष्ठिर उवाच
ब्राह्मणानर्चसे राजन् सततं संशितव्रतान्।
कं तु कर्मोदयं दृष्ट्वा तानर्चसि जनाधिप॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- हे राजन! आप सदैव उत्तम व्रतों का पालन करने वाले ब्राह्मणों का पूजन करते थे। अतः हे प्रभु! मैं जानना चाहता हूँ कि आपने उनके पूजन में कौन-सा लाभ देखा?॥1॥
 
Yudhishthira asked- O King! You always used to worship the Brahmins who followed the best vows. Therefore, O Lord! I want to know which benefit you saw in worshipping them?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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