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mahabharat 13.178.5: ब्रह्माजी ने कहा- हे इन्द्र आदि देवताओं! तुम लोग तुरन्त ब्राह्मणों की शरण में जाओ। उन्हें प्रसन्न करके तुम दोनों लोकों को पूर्ववत् प्राप्त करोगे।   |   mahabharat अध्याय 13.178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.178.5 
ब्रह्मोवाच
गच्छध्वं शरणं विप्रानाशु सेन्द्रा दिवौकस:।
प्रसाद्य तानुभौ लोकाववाप्स्यथ यथा पुरा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- हे इन्द्र आदि देवताओं! तुम लोग तुरन्त ब्राह्मणों की शरण में जाओ। उन्हें प्रसन्न करके तुम दोनों लोकों को पूर्ववत् प्राप्त करोगे।
 
Brahmaji said- O gods including Indra! You should immediately seek refuge in the Brahmins. After pleasing them, you will obtain both the worlds as before. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)