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mahabharat 13.178.26: हे वायुदेव! यह बड़े आनन्द की बात है कि आपने ब्राह्मणों के अद्भुत कर्मों का यथार्थ रूप मुझसे वर्णन किया है और मैंने उन सबका ध्यानपूर्वक श्रवण किया है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 13.178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.178.26 
अहो ब्राह्मणकर्माणि मया मारुत तत्त्वत:।
त्वया प्रोक्तानि कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन श्रुतानि प्रयतेन च॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे वायुदेव! यह बड़े आनन्द की बात है कि आपने ब्राह्मणों के अद्भुत कर्मों का यथार्थ रूप मुझसे वर्णन किया है और मैंने उन सबका ध्यानपूर्वक श्रवण किया है॥ 26॥
 
O Vayudev! It is a matter of great joy that you have described to me the wonderful deeds of the Brahmins in their true form and I have listened to them all attentively.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)