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mahabharat 13.178.25: विप्रवर दत्तात्रेयजी की कृपा से मैंने इस लोक में महान बल, महान यश और महान धर्म प्राप्त किया है ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 13.178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.178.25 
दत्तात्रेयप्रसादाच्च मया प्राप्तमिदं बलम्।
लोके च परमा कीर्तिर्धर्मश्चाचरितो महान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर दत्तात्रेयजी की कृपा से मैंने इस लोक में महान बल, महान यश और महान धर्म प्राप्त किया है ॥25॥
 
By the grace of Vipravar Dattatreyaji, I have attained great strength, great fame and great religion in this world. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)