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mahabharat 13.178.24: अर्जुन ने कहा, "हे प्रभु! मैं अपना जीवन हर प्रकार से और सदैव ब्राह्मणों के लिए ही जीता हूँ। मैं ब्राह्मणों का भक्त हूँ और प्रतिदिन ब्राह्मणों को प्रणाम करता हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 13.178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.178.24 
अर्जुन उवाच
जीवाम्यहं ब्राह्मणार्थं सर्वथा सततं प्रभो।
ब्रह्मण्यो ब्राह्मणेभ्यश्च प्रणमामि च नित्यश:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा, "हे प्रभु! मैं अपना जीवन हर प्रकार से और सदैव ब्राह्मणों के लिए ही जीता हूँ। मैं ब्राह्मणों का भक्त हूँ और प्रतिदिन ब्राह्मणों को प्रणाम करता हूँ।"
 
Arjuna said, "O Lord! I live my life for the sake of brahmins in every way and always. I am a devotee of brahmins and I bow to brahmins every day."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)