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mahabharat 13.178.18: हे मनुष्यों! उन प्यालों को नष्ट करके ब्राह्मणों द्वारा छोड़े गए सनातन अग्निदेव आकाश में बादलों के समान चमकने लगे॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 178: कप नामक दानवोंके द्वारा स्वर्गलोकपर अधिकार जमा लेनेपर ब्राह्मणोंका कपोंको भस्म कर देना, वायुदेव और कार्तवीर्य अर्जुनके संवादका उपसंहार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.178.18 
ब्रह्मसृष्टा हव्यभुज: कपान् हत्वा सनातना:।
नभसीव यथाभ्राणि व्यराजन्त नराधिप॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! उन प्यालों को नष्ट करके ब्राह्मणों द्वारा छोड़े गए सनातन अग्निदेव आकाश में बादलों के समान चमकने लगे॥18॥
 
O lord of men! After destroying those cups, the eternal Agnidev (fire god) released by the Brahmins began to shine in the sky like clouds.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)