श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.177.7 
अत्रिरुवाच
कथं रक्षामि भवतस्तेऽब्रुवंश्चन्द्रमा भव।
तिमिरघ्नश्च सविता दस्युहन्ता च नो भव॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अत्रि ने पूछा, "मैं आप सबकी रक्षा कैसे कर सकता हूँ?" देवताओं ने उत्तर दिया, "अंधकार का नाश करने वाले सूर्य और चन्द्रमा का रूप धारण करके इन डाकू राक्षसों का, जो हमारे शत्रु बन गए हैं, नाश करो।" ॥7॥
 
Atri asked, "How can I protect you all?" The gods replied, "Take the form of the Sun and the Moon, who destroy darkness, and destroy these robber demons who have become our enemies." ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)