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mahabharat 13.177.35: हे मनुष्यों के स्वामी! च्यवन ऋषि का यह महान कार्य आपसे भी कहा गया है। मैं पूछता हूँ, ब्राह्मण श्रेष्ठ है या आप? मुझे बताइए, ब्राह्मण से श्रेष्ठ कौन क्षत्रिय है?॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 13.177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.177.35 
एतत् ते च्यवनस्यापि कर्म राजन् प्रकीर्तितम्।
ब्रवीम्यहं ब्रूहि वा त्वं क्षत्रियं ब्राह्मणाद् वरम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! च्यवन ऋषि का यह महान कार्य आपसे भी कहा गया है। मैं पूछता हूँ, ब्राह्मण श्रेष्ठ है या आप? मुझे बताइए, ब्राह्मण से श्रेष्ठ कौन क्षत्रिय है?॥ 35॥
 
O Lord of men! This great deed of the sage Chyavana has also been told to you. I say, who is superior, the Brahmin or you? Tell me, which Kshatriya is superior to the Brahmin?॥ 35॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पवनार्जुनसंवादे षट्पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें वायु देवता और अर्जुनका संवादविषयक एक सौ छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)