श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.177.22 
च्यवन उवाच
न चेत् करिष्यसि वचो मयोक्तं बलसूदन।
मया प्रमथित: सद्य: सोमं पास्यसि वै मखे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
च्यवन ने कहा, "बलसूदन! यदि तुम मेरी आज्ञा का पालन नहीं करोगे तो यज्ञ में मैं तुम्हारे गर्व को चूर-चूर कर दूँगा और तुम तुरन्त सोमरस पीने लगोगे।"
 
Chyavana said, "Balasudan! If you do not obey my instructions then your pride will be crushed by me in the yagya and you will immediately start drinking the Soma juice."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)