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mahabharat 13.177.21: इन्द्र ने कहा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं दोनों अश्विनी कुमारों के साथ सोमपान कदापि नहीं करूँगा। यदि अन्य देवता चाहें तो उनके साथ सोमपान कर सकते हैं। मैं इसे नहीं पी सकता।"   |   mahabharat अध्याय 13.177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.177.21 
इन्द्र उवाच
अश्विभ्यां सह सोमं वै न पास्यामि द्विजोत्तम।
पिबन्त्वन्ये यथाकामं नाहं पातुमिहोत्सहे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा, "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं दोनों अश्विनी कुमारों के साथ सोमपान कदापि नहीं करूँगा। यदि अन्य देवता चाहें तो उनके साथ सोमपान कर सकते हैं। मैं इसे नहीं पी सकता।"
 
Indra said, "O best of Brahmins! I will certainly not drink Soma with the two Ashwini Kumars. If other gods wish, they may drink Soma with them. I cannot drink it."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)