vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन
»
श्लोक 20
श्लोक
13.177.20
क्रियतां मद्वचो देवा यथा वै समुदाहृतम्।
एतद् व: कुर्वतां श्रेयो भवेन्नैतदकुर्वताम्॥ २०॥
अनुवाद
हे देवताओं! मेरी बात मान लो। ऐसा करने में ही तुम्हारा कल्याण है, अन्यथा परिणाम अच्छा नहीं होगा।
O Gods! You should accept what I have said. It is in your best interest to do so; otherwise the result will not be good.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×