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mahabharat 13.177.17: इन्द्र बोले, "हे ब्राह्मण! अश्विनी के पुत्रों की हमने निंदा की है। फिर वे सोम पीने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं? ये दोनों देवताओं के समान पूजनीय नहीं हैं; अतः इनके विषय में ऐसी बात मत करो।"   |   mahabharat अध्याय 13.177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 177: अत्रि और च्यवन ऋषिके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.177.17 
इन्द्र उवाच
अस्माभिर्निन्दितावेतौ भवेतां सोमपौ कथम्।
देवैर्न सम्मितावेतौ तस्मान्मैवं वदस्व न:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले, "हे ब्राह्मण! अश्विनी के पुत्रों की हमने निंदा की है। फिर वे सोम पीने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं? ये दोनों देवताओं के समान पूजनीय नहीं हैं; अतः इनके विषय में ऐसी बात मत करो।"
 
Indra said, "O Brahmin! The sons of Ashwini have been condemned by us. Then how can they be entitled to drink Soma? These two are not as respected as the gods; therefore do not talk like this about them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)