Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.176.7: जब देवताओं ने ऐसा कहा, तब तेजस्वी अगस्त्य मुनि क्रोधित हो गए और प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोध से जलने लगे॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.176.7 
इत्युक्त: स तदा देवैरगस्त्य: कुपितोऽभवत्।
प्रजज्वाल च तेजस्वी कालाग्निरिव संक्षये॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं ने ऐसा कहा, तब तेजस्वी अगस्त्य मुनि क्रोधित हो गए और प्रलयकाल की अग्नि के समान क्रोध से जलने लगे॥7॥
 
When the gods said this, the brilliant sage Agastya became enraged and burned with rage like the fire of the doomsday. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)