Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.176.19-20: फिर वे सौ योजन ऊँचा सरोवर फेंककर और हाथों में बड़े-बड़े पर्वत, पर्वत और वृक्ष लेकर देवताओं पर टूट पड़े। उन दैत्यों की संख्या दस हजार थी। जब उन्होंने देवताओं को भली-भाँति पीड़ित कर दिया, तब वे भागकर इन्द्र की शरण में गए॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 13.176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर वे सौ योजन ऊँचा सरोवर फेंककर और हाथों में बड़े-बड़े पर्वत, पर्वत और वृक्ष लेकर देवताओं पर टूट पड़े। उन दैत्यों की संख्या दस हजार थी। जब उन्होंने देवताओं को भली-भाँति पीड़ित कर दिया, तब वे भागकर इन्द्र की शरण में गए॥19-20॥
‘Then, throwing the water of the lake a hundred yojanas high and holding huge mountains, mountains and trees in their hands, they attacked the gods. The number of those demons was ten thousand. When they had tormented the gods thoroughly, they fled and took refuge in Indra.॥ 19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥