श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.176.18 
अदूरात् तु ततस्तेषां ब्रह्मदत्तवरं सर:।
हताहता वै तत्रैते जीवन्त्याप्लुत्य दानवा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘उनके निकट ही मानसरोवर था, जिसके विषय में दैत्यों को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि ‘इसमें डुबकी लगाने से तुम्हें नया जीवन प्राप्त होगा’; इसलिए उस समय मारे गए दैत्यों को अन्य दैत्य उठाकर सरोवर में डाल देते थे और वे उसके जल में डुबकी लगाते ही पुनः जीवित हो जाते थे॥18॥
 
‘Near them was the Manasarovar, for which the demons had received a boon from Brahmaji that ‘by taking a dip in it you will get a new life’; therefore, at that time, the demons who got killed were picked up by other demons and thrown into the lake and they would come back to life as soon as they took a dip in its water.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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