श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.176.17 
यजमानांस्तु तान् दृष्ट्वा सर्वान् दीक्षानुकर्शितान्।
हन्तुमैच्छन्त शैलाभा: खलिनो नाम दानवा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘यज्ञ करने की दीक्षा लेकर सब देवता दुबले-पतले हो रहे थे। उन्हें यज्ञ करते देख पर्वत के समान विशाल शरीर वाले ‘खलि’ नामक दैत्य ने उन सबको मार डालने का विचार किया (तब दोनों दलों में युद्ध छिड़ गया)॥17॥
 
‘All the gods were becoming lean and thin after taking initiation in performing Yagya. Seeing them performing Yagya, a demon named ‘Khali’ who had a body as big as a mountain thought of killing them all (then a war broke out between the two groups).॥ 17॥
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