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mahabharat 13.176.14: ‘निष्पाप राजा! अगस्त्य ब्राह्मण होते हुए भी इतने प्रभावशाली कहे गए हैं। मैं यह कह रहा हूँ, यदि आप अगस्त्य ऋषि से भी श्रेष्ठ किसी क्षत्रिय को जानते हों, तो मुझे बताएँ।’॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.176.14 
ईदृशश्चाप्यगस्त्यो हि कथितस्ते मयानघ।
ब्रवीम्यहं ब्रूहि वा त्वमगस्त्यात् क्षत्रियं वरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘निष्पाप राजा! अगस्त्य ब्राह्मण होते हुए भी इतने प्रभावशाली कहे गए हैं। मैं यह कह रहा हूँ, यदि आप अगस्त्य ऋषि से भी श्रेष्ठ किसी क्षत्रिय को जानते हों, तो मुझे बताएँ।’॥14॥
 
‘Innocent King! Agastya is said to be so influential, even though he is a Brahmin. I am saying this, if you know of any Kshatriya who is better than sage Agastya, then tell me.’॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)