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इत्युक्त: प्राह देवान् स न शक्तोऽस्मि महीगतान्।
दग्धुं तपो हि क्षीयेन्मे न शक्यामीति पार्थिव॥ १२॥
अनुवाद
हे पृथ्वीपति! देवताओं के ऐसा कहने पर अगस्त्यजी ने उनसे कहा - 'अब मैं पृथ्वी पर रहने वाले दैत्यों को नहीं जला सकता; क्योंकि ऐसा करने से मेरी तपस्या क्षीण हो जाएगी। अतः यह कार्य मेरे लिए असम्भव है।'॥12॥
‘Lord of the Earth! When the gods said this, Agastyaji said to them – ‘Now I cannot burn the demons residing on the earth; because by doing so my penance will be weakened. Therefore this task is impossible for me.’॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥