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mahabharat 13.176.1: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! वायुदेवता के ऐसा कहने पर भी राजा कार्तवीर्य अर्जुन मौन रहे और कुछ न बोल सके। तब वायुदेवता ने उनसे पुनः कहा- 'राजन्! अब ब्राह्मण जाति के अगस्त्य का माहात्म्य सुनो-॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 176: ब्रह्मर्षि अगस्त्य और वसिष्ठके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.176.1 
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स नृपस्तूष्णीमभूद् वायुस्ततोऽब्रवीत्।
शृणु राजन्नगस्त्यस्य माहात्म्यं ब्राह्मणस्य ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! वायुदेवता के ऐसा कहने पर भी राजा कार्तवीर्य अर्जुन मौन रहे और कुछ न बोल सके। तब वायुदेवता ने उनसे पुनः कहा- 'राजन्! अब ब्राह्मण जाति के अगस्त्य का माहात्म्य सुनो-॥1॥
 
Bhishmaji says- Yudhishthira! Even after Vayu Devta said this, King Kartavirya Arjuna remained silent and could not say anything. Then Vayu Devta again said to him- 'King! Now listen to the greatness of Agastya of Brahmin caste-॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)