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mahabharat 13.175.9-10: राजा कार्तवीर्य अर्जुन कोई उत्तर न दे सके। वे चुपचाप बैठे रहे। तब पवनदेव ने पुनः कहा- 'राजन्! अब अंगिरा के कुल में उत्पन्न उथथय की कथा सुनिए। सोम की पुत्री भद्रा नाम से विख्यात थी। वह अपने समय की सबसे सुंदरी मानी जाती थी। चंद्रमा ने देखा कि महर्षि उथथय ही मेरी पुत्री के लिए उपयुक्त वर हैं।' 9-10.   |   mahabharat अध्याय 13.175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  13.175.9-10 
तूष्णीं बभूव नृपति: पवनस्त्वब्रवीत् पुन:।
शृणु राजन्नुतथ्यस्य जातस्याङ्गिरसे कुले॥ ९॥
भद्रा सोमस्य दुहिता रूपेण परमा मता।
तस्यास्तुल्यं पतिं सोम उतथ्यं समपश्यत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा कार्तवीर्य अर्जुन कोई उत्तर न दे सके। वे चुपचाप बैठे रहे। तब पवनदेव ने पुनः कहा- 'राजन्! अब अंगिरा के कुल में उत्पन्न उथथय की कथा सुनिए। सोम की पुत्री भद्रा नाम से विख्यात थी। वह अपने समय की सबसे सुंदरी मानी जाती थी। चंद्रमा ने देखा कि महर्षि उथथय ही मेरी पुत्री के लिए उपयुक्त वर हैं।' 9-10.
 
King Kartavirya Arjuna could not give any answer. He kept sitting quietly. Then the Wind God again said- 'King! Now listen to the story of Utthaya born in the family of Angira. Som's daughter was famous by the name Bhadra. She was considered the most beautiful woman of her time. The Moon saw that Maharishi Utthaya is the only suitable groom for my daughter. 9-10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)