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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.175.8 
एष राजन्नीदृशो वै ब्राह्मण: कश्यपोऽभवत्।
अन्यं प्रब्रूहि वा त्वं च कश्यपात् क्षत्रियं वरम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! कश्यपजी एक ब्राह्मण थे जिनका ऐसा प्रभाव देखा गया। यदि आप कश्यपजी से भी श्रेष्ठ किसी अन्य क्षत्रिय को जानते हों तो कृपया मुझे बताएँ।
 
King! Kashyapji was a Brahmin whose such influence was seen. If you know of any other Kshatriya who is better than Kashyap, then please tell me. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)