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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.175.6 
एवं वर्षसहस्राणि दिव्यानि विपुलव्रत:।
त्रिंशत: कश्यपो राजन् भूमिरासीदतन्द्रित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आलस्य से रहित होकर महर्षि कश्यप ने इस महान व्रत का पालन किया और तीस हजार दिव्य वर्षों तक पृथ्वी के रूप में रहे।
 
O King! Being devoid of laziness, Maharishi Kashyap observed this great vow and remained in the form of the Earth for thirty thousand divine years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)