vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन
»
श्लोक 6
श्लोक
13.175.6
एवं वर्षसहस्राणि दिव्यानि विपुलव्रत:।
त्रिंशत: कश्यपो राजन् भूमिरासीदतन्द्रित:॥ ६॥
अनुवाद
हे राजन! आलस्य से रहित होकर महर्षि कश्यप ने इस महान व्रत का पालन किया और तीस हजार दिव्य वर्षों तक पृथ्वी के रूप में रहे।
O King! Being devoid of laziness, Maharishi Kashyap observed this great vow and remained in the form of the Earth for thirty thousand divine years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×