Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.175.5: हे मनुष्यों के स्वामी! उनके आगमन से पृथ्वी पहले से भी अधिक समृद्ध हो गई। सर्वत्र घास और अन्न बहुतायत से उगने लगे। धर्म धीरे-धीरे बढ़ने लगा और भय का नाश हो गया। ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.175.5 
ऋद्धा सा सर्वतो जज्ञे तृणौषधिसमन्विता।
धर्मोत्तरा नष्टभया भूमिरासीत् ततो नृप॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उनके आगमन से पृथ्वी पहले से भी अधिक समृद्ध हो गई। सर्वत्र घास और अन्न बहुतायत से उगने लगे। धर्म धीरे-धीरे बढ़ने लगा और भय का नाश हो गया। ॥5॥
 
O Lord of men! With his entry the earth became more prosperous than before. Grass and grains began to grow in abundance everywhere. Dharma began to increase gradually and fear was destroyed. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)