श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.175.32 
एष राजन्नीदृशो वै उतथ्यो ब्राह्मणर्षभ:।
ब्रवीम्यहं ब्रूहि वा त्वमुतथ्यात् क्षत्रियं वरम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ये ब्राह्मण शिरोमणि उथय बहुत प्रभावशाली हैं। मैं यह कह रहा हूँ। यदि उथय से भी श्रेष्ठ कोई क्षत्रिय हो, तो आप उसे बताइए।॥32॥
 
O King! This Brahmin Shiromani Utthaya is so influential. I am saying this. If there is any Kshatriya who is better than Utthaya, then you tell him.'॥ 32॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पवनार्जुनसंवादो नाम चतुष्पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें वायु देवता तथा कार्तवीर्य अर्जुनका संवादनामक एक सौ चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)