Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.175.26-27: समुद्र के सूख जाने या पीछे हट जाने के कारण वहाँ का सम्पूर्ण स्थान बंजर हो गया। उस देश में बहने वाली सरस्वती नदी से द्विजश्रेष्ठ उतथ्य ने कहा - 'भयभीत सरस्वती! तुम अदृश्य होकर मरुभूमि में चली जाओ। शुभ हो! तुम्हारे द्वारा त्याग दिए जाने पर यह देश अपवित्र हो जाएगा।' 26-27॥ | mahabharat अध्याय 13.175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समुद्र के सूख जाने या पीछे हट जाने के कारण वहाँ का सम्पूर्ण स्थान बंजर हो गया। उस देश में बहने वाली सरस्वती नदी से द्विजश्रेष्ठ उतथ्य ने कहा - 'भयभीत सरस्वती! तुम अदृश्य होकर मरुभूमि में चली जाओ। शुभ हो! तुम्हारे द्वारा त्याग दिए जाने पर यह देश अपवित्र हो जाएगा।' 26-27॥
‘Due to the drying up or receding of the sea, the entire place there became barren. To the river Saraswati flowing through that country, Dwijashreshtha Uthathy said – 'Fearful Saraswati! You become invisible and go to the desert. Good luck! This country will become impure after being abandoned by you. 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥