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mahabharat 13.175.22: महामुनि! वरुण ने मेरा गला पकड़कर मुझे धक्का दे दिया है। वह आपकी पत्नी को मुझे नहीं दे रहा है, अब आप जो चाहें करें।॥22॥   |   mahabharat अध्याय 13.175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.175.22 
गले गृहीत्वा क्षिप्तोऽस्मि वरुणेन महामुने।
न प्रयच्छति ते भार्यां यत् ते कार्यं कुरुष्व तत् ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! वरुण ने मेरा गला पकड़कर मुझे धक्का दे दिया है। वह आपकी पत्नी को मुझे नहीं दे रहा है, अब आप जो चाहें करें।॥22॥
 
‘Mahamuni! Varuna has grabbed my throat and pushed me. He is not giving your wife to me, now do whatever you want to do.’॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)