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श्लोक 13.175.22  |
गले गृहीत्वा क्षिप्तोऽस्मि वरुणेन महामुने।
न प्रयच्छति ते भार्यां यत् ते कार्यं कुरुष्व तत् ॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| महामुनि! वरुण ने मेरा गला पकड़कर मुझे धक्का दे दिया है। वह आपकी पत्नी को मुझे नहीं दे रहा है, अब आप जो चाहें करें।॥22॥ |
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| ‘Mahamuni! Varuna has grabbed my throat and pushed me. He is not giving your wife to me, now do whatever you want to do.’॥ 22॥ |
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