vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 175: ब्राह्मणशिरोमणि उतथ्यके प्रभावका वर्णन
»
श्लोक 22
श्लोक
13.175.22
गले गृहीत्वा क्षिप्तोऽस्मि वरुणेन महामुने।
न प्रयच्छति ते भार्यां यत् ते कार्यं कुरुष्व तत् ॥ २२॥
अनुवाद
महामुनि! वरुण ने मेरा गला पकड़कर मुझे धक्का दे दिया है। वह आपकी पत्नी को मुझे नहीं दे रहा है, अब आप जो चाहें करें।॥22॥
‘Mahamuni! Varuna has grabbed my throat and pushed me. He is not giving your wife to me, now do whatever you want to do.’॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×