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mahabharat 13.174.9: देखो, ये सगर के पुत्रों की राख के ढेर हैं, जो सर्वोच्च जाति के कपिल मुनि के शाप से भस्म हो गये थे, जो यज्ञ के लिए उपयोग किये जाने वाले घोड़े की खोज में समुद्र के पास आये थे।   |   mahabharat अध्याय 13.174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.174.9 
महतश्चूर्णितान् पश्य ये हासन्त महोदधिम्।
सुवर्णधारिणा नित्यमवशप्ता द्विजातिना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
देखो, ये सगर के पुत्रों की राख के ढेर हैं, जो सर्वोच्च जाति के कपिल मुनि के शाप से भस्म हो गये थे, जो यज्ञ के लिए उपयोग किये जाने वाले घोड़े की खोज में समुद्र के पास आये थे।
 
Behold, these are the heaps of ashes of the sons of Sagara, who were burnt by the curse of the sage Kapil of the highest caste, who had come to the sea in search of the horse used for the sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)