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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन
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श्लोक 7
श्लोक
13.174.7
तथा समुद्रो नृपते पूर्णो मृष्टस्य वारिण:।
ब्राह्मणैरभिशप्तश्च बभूव लवणोदक:॥ ७॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! पहले समुद्र मीठे जल से भरा हुआ था, किन्तु ब्राह्मणों के शाप के कारण उसका जल खारा हो गया।
O Lord of men! Earlier the ocean was full of fresh water, but due to the curse of the Brahmins its water became salty. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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