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mahabharat 13.174.6: महर्षि गौतम ने अहिल्या पर आसक्त होने के कारण धनवान इन्द्र को शाप दिया था। उनके प्राण केवल धर्म की रक्षा के लिए नहीं लिये गये थे। 6॥   |   mahabharat अध्याय 13.174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.174.6 
अथ शप्तश्च भगवान‍् गौतमेन पुरन्दर:।
अहल्यां कामयानो वै धर्मार्थं च न हिंसित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महर्षि गौतम ने अहिल्या पर आसक्त होने के कारण धनवान इन्द्र को शाप दिया था। उनके प्राण केवल धर्म की रक्षा के लिए नहीं लिये गये थे। 6॥
 
Maharishi Gautam had cursed the wealthy Indra because he was attached to Ahalya. Their lives were not taken just to protect religion. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)