vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन
»
श्लोक 6
श्लोक
13.174.6
अथ शप्तश्च भगवान् गौतमेन पुरन्दर:।
अहल्यां कामयानो वै धर्मार्थं च न हिंसित:॥ ६॥
अनुवाद
महर्षि गौतम ने अहिल्या पर आसक्त होने के कारण धनवान इन्द्र को शाप दिया था। उनके प्राण केवल धर्म की रक्षा के लिए नहीं लिये गये थे। 6॥
Maharishi Gautam had cursed the wealthy Indra because he was attached to Ahalya. Their lives were not taken just to protect religion. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×