Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.174.5: वही अंगिरा ऋषि एक बार मुझ पर क्रोधित हो गए थे। उनके भय से मुझे यह संसार छोड़कर दीर्घकाल तक अग्निहोत्र में रहना पड़ा था। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन्नहं च क्रुद्धे वै जगत् त्यक्त्वा ततो गत:।
व्यतिष्ठमग्निहोत्रे च चिरमङ्गिरसो भयात्॥ ५॥
अनुवाद
वही अंगिरा ऋषि एक बार मुझ पर क्रोधित हो गए थे। उनके भय से मुझे यह संसार छोड़कर दीर्घकाल तक अग्निहोत्र में रहना पड़ा था। ॥5॥
The same sage Angira had once become angry with me. Out of fear of him, I had to leave this world and live in the fire of Agnihotra for a long time. ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥