Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.174.3-4: राजन! ब्राह्मण इस मृत्युलोक में और स्वर्ग में भी अजेय हैं। पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने दूध के समान जल पिया था। उस समय उन्हें पीने से तृप्ति नहीं हुई। अतः पीते-पीते उन्होंने अपनी शक्ति से पृथ्वी का सारा जल पी लिया। पृथ्वीनाथ! तत्पश्चात् उन्होंने जल का एक महान स्रोत छोड़ा और उससे सारी पृथ्वी भर गई। 3-4॥ | mahabharat अध्याय 13.174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अजेया ब्राह्मणा राजन् दिवि चेह च नित्यदा।
अपिबत् तेजसा ह्याप: स्वयमेवाङ्गिरा: पुरा॥ ३॥
स ता: पिबन् क्षीरमिव नातृप्यत महामना:।
अपूरयन्महौघेन महीं सर्वां च पार्थिव॥ ४॥
अनुवाद
राजन! ब्राह्मण इस मृत्युलोक में और स्वर्ग में भी अजेय हैं। पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने दूध के समान जल पिया था। उस समय उन्हें पीने से तृप्ति नहीं हुई। अतः पीते-पीते उन्होंने अपनी शक्ति से पृथ्वी का सारा जल पी लिया। पृथ्वीनाथ! तत्पश्चात् उन्होंने जल का एक महान स्रोत छोड़ा और उससे सारी पृथ्वी भर गई। 3-4॥
Rajan! Brahmins are invincible in this mortal world and also in heaven. Earlier, sage Angira had drank water like milk. At that time he did not feel satisfied by drinking. So, while drinking, he drank all the water of the earth with his power. Prithvinath! After that he released a great source of water and filled the entire earth. 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥