नास्त्यण्डमस्ति तु ब्रह्मा स राजा लोकभावन:।
इत्युक्त: स तदा तूष्णीमभूद् वायुस्ततोऽब्रवीत्॥ १९॥
अनुवाद
वास्तव में अण्डा जैसी कोई वस्तु नहीं है। फिर भी ब्रह्माजी विद्यमान हैं, क्योंकि वे ही जगत के रचयिता हैं। उनके ऐसा कहने पर राजा कार्तवीर्य अर्जुन चुप हो गए, तब वायु देवता ने उनसे पुनः कहा॥19॥
In reality there is no such thing as an egg. Still Brahmaji exists because he is the creator of the universe. After he said this, King Kartavirya Arjuna became silent, then Vayu Devta spoke to him again.॥19॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पवनार्जुनसंवादे त्रिपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें वायुदेवता और कार्तवीर्य अर्जुनका संवादविषयक एक सौ तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥