श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.173.28 
वायोर्वा सदृशं किंचिद् ब्रूूहि त्वं ब्राह्मणोत्तमम्।
अपां वै सदृशं वह्ने: सूर्यस्य नभसोऽपि वा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अथवा जल, अग्नि, सूर्य, वायु और आकाश के समान यदि कोई ब्राह्मण महान हो तो उसे भी बताओ ॥28॥
 
Or if there is any Brahmin as great as water, fire, sun, air and sky, then tell him also. 28॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पवनार्जुनसंवादे ब्राह्मणमाहात्म्ये द्विपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें वायुदेवता और अर्जुनके संवादके प्रसंगमें ब्राह्मणोंका माहात्म्यविषयक एक सौ बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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