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mahabharat 13.173.27: कार्तवीर्य अर्जुन बोले—वायुदेव! ऐसा कहकर आपने ब्राह्मणों के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम प्रकट किया है। अच्छा, यदि आप पृथ्वी के समान क्षमाशील किसी ब्राह्मण को जानते हों, तो कृपया मुझे ऐसे ब्राह्मण के विषय में बताइए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.173.27 
अर्जुन उवाच
अहो त्वयायं विप्रेषु भक्तिराग: प्रदर्शित:।
यादृशं पृथिवीभूतं तादृशं ब्रूहि मे द्विजम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कार्तवीर्य अर्जुन बोले—वायुदेव! ऐसा कहकर आपने ब्राह्मणों के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम प्रकट किया है। अच्छा, यदि आप पृथ्वी के समान क्षमाशील किसी ब्राह्मण को जानते हों, तो कृपया मुझे ऐसे ब्राह्मण के विषय में बताइए॥ 27॥
 
Kartavirya Arjuna said—Vayudev! By saying this you have shown your devotion and love towards Brahmins. Well, if you know of a Brahmin who is as forgiving as the earth, then please tell me about such a Brahmin.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)