श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.173.26 
तं राजा कस्त्वमित्याह ततस्तं प्राह मारुत:।
वायुर्वै देवदूतोऽस्मि हितं त्वां प्रब्रवीम्यहम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर कार्तवीर्य ने पूछा, ‘महाराज, आप कौन हैं?’ तब वायुदेव ने उनसे कहा, ‘हे राजन, मैं देवताओं का दूत वायु हूं और मैं आपको एक ऐसी बात बता रहा हूं जो कल्याणकारी है।’
 
On hearing this, Kartavirya asked, 'Sir, who are you?' Then the wind god said to him, 'O King, I am Vayu, the messenger of the gods, and I am telling you something that is beneficial.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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