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श्लोक 13.173.24  |
त्यजैनं कलुषं भावं ब्राह्मणेभ्यो नमस्कुरु।
एतेषां कुर्वत: पापं राष्ट्रक्षोभो भविष्यति॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| कार्तवीर्य! इस दुष्टवृत्ति को त्यागकर ब्राह्मणों को नमस्कार करो। यदि तुम उनकी निन्दा करोगे, तो तुम्हारे राज्य में कोलाहल मच जाएगा॥ 24॥ |
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| Kartaveerya! Give up this evil attitude and salute the Brahmins. If you speak ill of them, there will be commotion in your kingdom.॥ 24॥ |
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