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mahabharat 13.173.24: कार्तवीर्य! इस दुष्टवृत्ति को त्यागकर ब्राह्मणों को नमस्कार करो। यदि तुम उनकी निन्दा करोगे, तो तुम्हारे राज्य में कोलाहल मच जाएगा॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.173.24 
त्यजैनं कलुषं भावं ब्राह्मणेभ्यो नमस्कुरु।
एतेषां कुर्वत: पापं राष्ट्रक्षोभो भविष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कार्तवीर्य! इस दुष्टवृत्ति को त्यागकर ब्राह्मणों को नमस्कार करो। यदि तुम उनकी निन्दा करोगे, तो तुम्हारे राज्य में कोलाहल मच जाएगा॥ 24॥
 
Kartaveerya! Give up this evil attitude and salute the Brahmins. If you speak ill of them, there will be commotion in your kingdom.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)