श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.173.23 
अर्जुनस्य वच: श्रुत्वा वित्रस्ताभून्निशाचरी।
अथैनमन्तरिक्षस्थस्ततो वायुरभाषत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के ये वचन सुनकर निशाचरी भी भयभीत हो गई। तत्पश्चात अंतरिक्ष में स्थित वायु देवता ने कहा-॥23॥
 
Hearing these words of Arjun, Nishachari also got scared. Thereafter, the Vayu deity situated in the space said – ॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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