अद्य ब्रह्मोत्तरं लोकं करिष्ये क्षत्रियोत्तरम्।
न हि मे संयुगे कश्चित् सोढुमुत्सहते बलम्॥ २२॥
अनुवाद
अब तक संसार में ब्राह्मणों को श्रेष्ठ माना जाता था, किन्तु आज से मैं क्षत्रियों का वर्चस्व स्थापित करूँगा। युद्ध में मेरे बल का सामना कोई नहीं कर सकता।
Till now the Brahmins were considered the best in the world, but from today I will establish the supremacy of the Kshatriyas. No one can withstand my strength in a battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥