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mahabharat 13.173.2: भीष्म बोले - 'भरतनन्दन! इस विषय में विद्वान पुरुष कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवता के संवाद रूपी इस प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं।॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.173.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
पवनस्य च संवादमर्जुनस्य च भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'भरतनन्दन! इस विषय में विद्वान पुरुष कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवता के संवाद रूपी इस प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं।॥ 2॥
 
Bhishma said, 'Bharatanandan! In this matter, learned men give the example of this ancient story in the form of a dialogue between Kartavirya Arjuna and Vayudevata.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)