Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.173.12-13h: तत्पश्चात्, राजा कार्तवीर्य अर्जुन सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी रथ पर बैठकर (सारी पृथ्वी को जीतकर) अपने बल के गर्व से मोहित हो गए और बोले - 'धैर्य, वीर्य, यश, शौर्य, पराक्रम और तेज में मेरे समान कौन है?' 12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स रथमास्थाय ज्वलनार्कसमद्युतिम्।
अब्रवीद् वीर्यसम्मोहात् को वास्ति सदृशो मम॥ १२॥
धैर्यैर्वीर्यैर्यश:शौर्यैर्विक्रमेणौजसापि वा।
अनुवाद
तत्पश्चात्, राजा कार्तवीर्य अर्जुन सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी रथ पर बैठकर (सारी पृथ्वी को जीतकर) अपने बल के गर्व से मोहित हो गए और बोले - 'धैर्य, वीर्य, यश, शौर्य, पराक्रम और तेज में मेरे समान कौन है?' 12 1/2॥
Thereafter, King Kartavirya Arjuna, sitting on a chariot as bright as the sun and fire (after conquering the entire earth), became infatuated with the pride of his strength and said - 'Who is equal to me in patience, semen, fame, bravery, valor and vigor?' 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥