Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.173.11: उसकी प्रार्थना पर दत्तात्रेयजी ने राजा से कहा, ‘ऐसा ही हो।’ तब उस महाप्रतापी राजा के लिए सभी वरदान उसी प्रकार पूर्ण हो गए। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.173.11 
इत्युक्त: स द्विज: प्राह तथास्त्विति नराधिपम्।
एवं समभवंस्तस्य वरास्ते दीप्ततेजस:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसकी प्रार्थना पर दत्तात्रेयजी ने राजा से कहा, ‘ऐसा ही हो।’ तब उस महाप्रतापी राजा के लिए सभी वरदान उसी प्रकार पूर्ण हो गए। ॥11॥
 
On his prayer, Dattatreya said to the king, 'So be it.' Then all the boons came true for that illustrious king in the same manner. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)