श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.173.1 
युधिष्ठिर उवाच
कां तु ब्राह्मणपूजायां व्युष्टिं दृष्ट्वा जनाधिप।
कं वा कर्मोदयं मत्वा तानर्चसि महामते॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, 'हे प्रभु! ब्राह्मणों की पूजा करने से आपको क्या फल मिलता है? हे महात्मन! अथवा आपके अनुसार कौन-सा कर्म उन ब्राह्मणों की पूजा करने के लिए उत्तरदायी है?'
 
Yudhishthira said, 'O Lord! What reward do you expect from worshipping Brahmins? O great one! Or what karma do you think is responsible for worshipping those Brahmins?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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