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mahabharat 13.172.3: अतः ब्राह्मणों का पूजन करो। ब्राह्मणों को नमस्कार करो। उनके साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा सुयोग्य पुत्र अपने पिता के साथ करता है; क्योंकि बुद्धिमान ब्राह्मण इन सब लोकों को धारण करते हैं। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 13.172: ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 172: ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.172.3 
ते पूज्यास्ते नमस्कार्या वर्तेथास्तेषु पुत्रवत्।
ते हि लोकानिमान् सर्वान् धारयन्ति मनीषिण:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अतः ब्राह्मणों का पूजन करो। ब्राह्मणों को नमस्कार करो। उनके साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा सुयोग्य पुत्र अपने पिता के साथ करता है; क्योंकि बुद्धिमान ब्राह्मण इन सब लोकों को धारण करते हैं। ॥3॥
 
Therefore, worship the Brahmins. Salute the Brahmins. Behave with them in the same manner as a worthy son behaves with his father; because wise Brahmins hold on to all these worlds. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)