श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 172: ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.172.23 
एवं यद्यप्यनिष्टेषु वर्तते सर्वकर्मसु।
सर्वथा ब्राह्मणो मान्यो दैवतं विद्धि तत्परम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यदि ब्राह्मण सब प्रकार के पाप कर्मों में भी लगा हुआ हो, तो भी वह सर्वथा पूजनीय है। उसे परम देवता समझो॥23॥
 
Thus, even if a Brahmin is engaged in all kinds of evil deeds, he is completely respectable. Consider him the supreme god. 23॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ब्राह्मणप्रशंसायामेकपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ब्राह्मणकी प्रशंसाविषयक एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५१॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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