श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 172: ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.172.1 
युधिष्ठिर उवाच
के पूज्या: के नमस्कार्या: कथं वर्तेत केषु च।
किमाचार: कीदृशेषु पितामह न रिष्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! इस संसार में पूजनीय कौन लोग हैं? हमें किसको नमस्कार करना चाहिए? किसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए तथा किस प्रकार के लोगों के साथ कैसा व्यवहार अपनाना चाहिए, जिससे किसी को हानि न हो?"॥1॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! Who are the people who are worthy of worship in this world? Who should we greet? How should we behave with whom and what kind of behavior should be adopted with what kind of people so that it does not cause harm?"॥1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas