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mahabharat 13.171.9: भरतसिंह! जो राजा अपने मन और इन्द्रियों को वश में करके शांतिपूर्वक प्रतिदिन इस मंत्र का जप करते हैं, वे उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.171.9 
इदमाह्निकमव्यग्रं कुर्वद्भिर्नियतै: सदा।
नृपैर्भरतशार्दूल प्राप्यते श्रीरनुत्तमा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भरतसिंह! जो राजा अपने मन और इन्द्रियों को वश में करके शांतिपूर्वक प्रतिदिन इस मंत्र का जप करते हैं, वे उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं॥9॥
 
Bharat Singh! Those kings who peacefully chant this mantra every day after controlling their mind and senses, attain the best wealth. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)