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mahabharat 13.171.82: राजन! मैंने तुम्हें सनातन ब्रह्मरूपी गायत्री का माहात्म्य बताया है। भारत! अब तुम जो कुछ और पूछना चाहते हो, वह भी मैं तुम्हें बताता हूँ ॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  13.171.82 
एषा ते कथिता राजन् सावित्री ब्रह्म शाश्वती।
विवक्षुरसि यच्चान्यत् तत् ते वक्ष्यामि भारत॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैंने तुम्हें सनातन ब्रह्मरूपी गायत्री का माहात्म्य बताया है। भारत! अब तुम जो कुछ और पूछना चाहते हो, वह भी मैं तुम्हें बताता हूँ ॥ 82॥
 
King! I have told you the greatness of Gayatri who is the eternal Brahman. Bharat! Now whatever else you wish to ask, I will tell you that too. ॥ 82॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि सावित्रीव्रतोपाख्याने पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें सावित्रीमन्त्रकी महिमाविषयक एक सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)