Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.81: भृगु का नाम लेने से धर्म की वृद्धि होती है। वशिष्ठ ऋषि को नमस्कार करने से वीर्य की वृद्धि होती है। जो क्षत्रिय राजा रघु को प्रणाम करता है, वह युद्ध में विजयी होता है और जो अश्विनी कुमारों का नाम लेता है, वह कभी रोगग्रस्त नहीं होता ॥81॥ | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मो विवर्धति भृगो: परिकीर्तनेन
वीर्यं विवर्धति वसिष्ठनमोनतेन।
संग्रामजिद् भवति चैव रघुं नमस्यन्
स्यादश्विनौ च परिकीर्तयतो न रोग:॥ ८१॥
अनुवाद
भृगु का नाम लेने से धर्म की वृद्धि होती है। वशिष्ठ ऋषि को नमस्कार करने से वीर्य की वृद्धि होती है। जो क्षत्रिय राजा रघु को प्रणाम करता है, वह युद्ध में विजयी होता है और जो अश्विनी कुमारों का नाम लेता है, वह कभी रोगग्रस्त नहीं होता ॥81॥
Taking the name of Bhrigu increases Dharma. Salutation to sage Vashishtha increases semen. The Kshatriya who pays obeisance to King Raghu becomes victorious in battle and the person who takes the name of Ashwini Kumars never suffers from disease. 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥