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mahabharat 13.171.80: जो मनुष्य विद्वान् और विद्वान् ब्राह्मण को सोने से मढ़ी हुई सौ गायों के सींग दान करता है और जो प्रतिदिन केवल महाभारत की दिव्य कथा का उपदेश करता है, उन दोनों को समान पुण्य फल प्राप्त होता है ॥ 80॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  13.171.80 
यो गोशतं कनकशृङ्गमयं ददाति
विप्राय वेदविदुषे च बहुश्रुताय।
दिव्यां च भारतकथां कथयेच्च नित्यं
तुल्यं फलं भवति तस्य च तस्य चैव॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य विद्वान् और विद्वान् ब्राह्मण को सोने से मढ़ी हुई सौ गायों के सींग दान करता है और जो प्रतिदिन केवल महाभारत की दिव्य कथा का उपदेश करता है, उन दोनों को समान पुण्य फल प्राप्त होता है ॥ 80॥
 
The man who donates the horns of a hundred cows plated with gold to a learned and erudite Brahmin and the one who daily preaches only the divine story of Mahabharata, both of them get the same meritorious result. ॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)